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शनिवार, 29 सितंबर 2012

परिचय - महेश्वरी कनेरी





 
   मैं कौन हूँ…? कहाँ से आई हूँ…?
ये सभी अनबुझ प्रश्न हमारे मानस पटल पर अकसर आ-आकर दस्तक देजाते हैं..और हम. शुन्य में ताकते रह जाते हैं,
कभी सोचती  
 ईश्वर की बनाई गई अनुपम कृतियों में से एक हूँ मैं
कभी सोचती
माता-पिता की उम्मीद और विश्वास की एक कण हूँ मैं
जो भी सोचती हूँ बस खुद को तसल्ली  सी दे्ती हूँ
बस इतना ही कह सकती हूँ
खुद को खुद में तलाशती
एक बहती जल धार हूँ मैं
बहना अगर नियति है तो
बहती  ही जाऊँगी ..
मन में उठते भावो को न रोक सकी थी कभी
न अब रोक पाऊँगी
रुकना नही मुझे
 चलना है बस चलते ही जाना है …….
 
नाम-                महेश्वरी कनेरी
जन्म तिथि -.                  २६ नवम्बर १९४७
जन्म स्थान           देहरादून-उत्तराखण्ड़
शिक्षा                 स्नातक
भाषाज्ञान              हिन्दी अग्रे़जी
माता                 स्वर्गीय श्रीमती रुकमणी देवी
पिता-                 स्वर्गीय श्री कुशाल सिंह रजवार
विशेष रुचि-             लिखने पढ़ने के अतिरिक्त संगीत एवं चित्र कला
व्यवसाय-               केन्द्रीय विधालय मे शिक्षिका और मुख्याधिपिका के रुप में रह चुकी,अब सेवा
                    निवृत हूँ
प्रकाशित काव्य संग्रह -   आओ मिल कर गाएं गीत अनेक (बच्चों के लिए)
साझा काव्य संग्रह  -    “टुटते सितारो की उड़ान” “प्रतिभाओं की कमी नहीं”..
अन्य कृतियाँ (कैसेट)     ओडियो कैसेट “गीत नाटिका” संग्रह बच्चों के लिए,  “मूर्तिकार”
 सम्मान-             १- प्रोत्साहन पुरस्कार द्वारा, केन्द्रीय विधालय संगठन १९९४,
                    २- राष्ट्र्पति पुरस्कार,२०००
मेरा ब्लांग-           मुख्य ब्लांग “अभिव्यंजना “
                    निर्माणाधीन ब्लांग- बच्चों के लिए “बाल मन की राहें “
ई-मेल-              maheshwari.kaneri@gmail.com
ब्लांग पता          http://kaneriabhivainjana.blogspot.in

बुधवार, 26 सितंबर 2012

परिचय - वंदना गुप्ता





 
अपरिचित हूँ मैं ..........

ना जाने कैसे कह देते हैं
हाँ , जानते हैं हम 
खुद  को या फ़लाने को
मगर किसे जानते हैं
ये भेद ना जान पाते हैं
कौन है वो ?
शरीर का लबादा ओढ़े 
आत्मा या ये शरीर
ये रूप
ये चेहरा -मोहरा
कौन है वो
जिसे हम जानते हैं
जो एक पहचान  बनता है
क्या शरीर ?
यदि शरीर पहचान है तो
फिर आत्मा की क्या जरूरत
मगर शरीर निष्क्रिय है तब तक
जब तक ना आत्मा का संचार हो
एक चेतन रूप ना विराजमान हो
तो शरीर तो ना पहचान हुआ 
तो क्या हम
आत्मा को जानते हैं
वो होती है पहचान 
ये प्रश्न खड़ा हो जाता है
अर्थात शरीर का तो 
अस्तित्व ही मिट जाता है
मगर सुना है
आत्मा का तो 
ना कोई स्वरुप होता है
आत्मा नित्य है
शाश्वत है
उसका ना कोई रूप है
ना रंग
फिर क्या है वो
एक हवा का झोंका 
जो होकर भी नहीं होता
फिर कैसे कह दें
हाँ जानते हैं हम
खुद को या फ़लाने को
क्योंकि ना वो आत्मा है
ना वो शरीर है
फिर क्या है शाश्वत सत्य
और क्या है अनश्वर
दृष्टिदोष तो नहीं
कैसे पृथक करें 
और किसे स्थापित करें
द्वन्द खड़ा हो जाता है
शरीर और आत्मा का 
भेद ना मिटा पाता है
कोई पहचान ना मिल पाती है
ना शरीर को
ना आत्मा को
दोनों ही आभासी हो जाते हैं
शरीर नश्वर 
आत्मा अनश्वर 
फिर कैसे पहचान बने
विपरीत ध्रुवों का एकीकरण 
संभव ना हो पाता है 
फिर कैसे कोई कह सकता है
फलाना राम है या सीता
फलाना मोहन है या गीता
ये नाम की गंगोत्री में उलझा 
पहचान ना बन पाता है
ना शरीर है अपना ना आत्मा
दोनों हैं सिर्फ आभासी विभूतियाँ
मगर सत्य तो एक ही
कायम रहता है
सिर्फ पहचान देने को
एक नाम भर बन जाने को
आत्मा ने शरीर का
आवरण ओढा होता है
पर वास्तविकता तो 
हमेशा यही रहती है
कोई ना किसी को जान पाता है
खुद को भी ना पहचान पाता है
फिर दूसरे को हम जानते हैं
स्वयं को पहचानते हैं 
ये प्रश्न ही निरर्थक हो जाता है
ये तो मात्र दृष्टिभ्रम लगता है
जब तक ना स्वयं का बोध होता है 
तो बताओ ,
कैसे परिचय दूं अपना
कौन हूँ
क्या हूँ
ज्ञात नहीं
अज्ञात को जाने की 
प्रक्रिया में हूँ तत्पर
परिचय की ड्योढ़ी पर
दरवाज़ा खटखटाते हुए
अपरिचित हूँ मैं ..........


नाम: वन्दना गुप्ता
फोन : 9868077896
मेल: rosered8flower@gmail.com
ब्लोगिंग की शुरुआत जून 2007 
प्रकाशित साझा काव्य संग्रह : 1)“टूटते सितारों की उडान “
                                          2)“स्त्री होकर सवाल करती है “
                                 3)"ह्रदय तारों का स्पंदन"            
                              4) शब्दों के अरण्य मे 
                                     5) प्रतिभाओं की कमी नहीं
                  6) कस्तूरी                    
           प्रकाशित साझा पुस्तकें : 1) हिन्दी ब्लोगिंग : अभिव्यक्ति की नई क्रांति
                                                                              2)हिन्दीन ब्लॉ्गिंग : स्वपरुप, व्याहप्ति और संभावनाएं 

                             पत्रिकाओं मे प्रकाशित रचनायें : ब्लोग इन मीडिया, गजरौला टाइम्स ,उदंती छत्तीसगढ़ रायपुर ,                                                        
                                                                                 स्वाभिमान टाइम्स, हमारा मेट्रो, सप्तरंगी प्रेम. हिंदी साहित्य शिल्पी, 
                                                                                वटवृक्ष मधेपुरा टाइम्स, नव्या ,नयी गज़ल ,OBO पत्रिका, प्रेम. हिंदी 
                                                                              साहित्य शिल्पी , वटवृक्ष ,मधेपुरा टाइम्स, नव्या ,लोकसत्य ,नयी गज़ल, ओबीओ पत्रिका, गर्भनाल और कादंबिनी, विभिन्न इ-मैगज़ीन आदि।

निम्न तीन ब्लोग हैं
1) ज़िन्दगी ………एक खामोश सफ़र (http://vandana-zindagi.blogspot.com)
2) ज़ख्म …………जो फ़ूलों ने दिये  (http://redrose-vandana.blogspot.com)
                3) एक प्रयास (http://ekprayas-vandana.blogspot.com)


सोमवार, 17 सितंबर 2012

परिचय-ऋता शेखर मधु



मेरा परिचय

रश्मिप्रभा दी ने कहा- अपना परिचय भेजो

पर क्या लिखूँ...मुझमें कुछ भी खास नहीं

रश्मि दी ने कहा-

तुम संवेदनशील हो, यह परिचय खास है

अब कुछ न कुछ तो लिखना ही था

एक कोशिश अपना परिचय देने की...

कौन हूँ मैं

ब्रह्म मुहुर्त में

कौंधा एक सवाल

कौन हूँ मैं ?

क्या परिचय है मेरा ?

सिर्फ एक नाम

या और भी बहुत-कुछ

वह, जो अतीत में थी

या जो अभी हूँ

या जो भविष्य में होऊँगी

यादों के झरोखों से

झाँककर जो देखा

एक खिलखिलाती चुलबुली

नन्ही सी लड़की

अपने भाई-बहन के साथ

बागों में तितलियों के पीछे भागती

दादा-दादी की लाडली

चाचा-बूआ की प्यारी

मम्मी-पापा की आँखों का तारा

विद्यालय में

शिक्षकों के लिए

एक होनहार विद्यार्थी,

इस तरह से बचपन जीती हुई

कब और क्यूँ

विदाई की बातें होने लगीं

इनका जवाब तलाशती

लाल जोड़े में

ससुराल की देहरी के अन्दर

मेरे किरदार बदल गए

बहू, पत्नी,

दो प्यारे-प्यारे बच्चों की माँ

मेरे अपने पल

कब इनके हो गए

पता ही नहीं चला

मन की इच्छाएँ

कर्तव्यों के ताले में

बन्द हो गए

समय बीता

धीरे-धीरे मेरे पल

मुझे वापस मिलने लगे

फुरसत में देखा

तहायी हुई इच्छाएँ वहीं पड़ी थीं

कुछ लिखने की इच्छा

अपने विचार शेयर करने की इच्छा

फिर देर नहीं किया

माँ सरस्वती की कृपा से

अपनी लेखनी के साथ

मैं, ऋता शेखर मधु

आपके सामने हूँ

जब कलम उठाया तो

सबसे पहले जो लिखा

मेरा उद्गार

जीवन की आपाधापी में

जीवन के संघर्ष में

रिश्तों के तानोंबानों में

ऐसी उलझी मैं,

फुर्सत न मिली सोचने की

हूँ मैं भी एक मैं|

कुछ पल मिले बैठने को

लगा कहाँ हूँ मैं

दुनिया की इस भीड़ में

कहीं तो हूँ मैं

मन में था विचारों का रेला

बहने को बेताब हुआ|

लेखनी आ गई हाथों में

कागज़ से उसका मिलाप हुआ|

उभर आए अक्षर के मोती

पिरोने का संतोष हआ|

पसन्द आए अगर ये माला

समझूँगी जीवन धन्य हुआ|

*---*---*---*---*---*---*---*

इसके बाद कुछ कविताएँ लिखीं| कुछ सार्थक लिख भी पा रही हूँ या नहीं, विश्वास डावाँडोल हो गया| छोटे भाई के समान एक करीबी लेखक एवं पत्रकार मित्र को कविताएँ पढ़ने के लिए भेजा| मेरी कविताओं के लिए जो कुछ भी उन्होंने लिखा वह उत्साहित कर गई मुझे| आप भी पढ़िए---

कविताएँ आपकी

उतर जाती हैं

मन की गहराइयों में

कविताएँ आपकी|

शब्दों में अर्थ है

पंक्तियों में भाव

रस हैं, छंद हैं

लय ही स्वभाव|

अलंकृत हो मचलती हैं

कविताएँ आपकी||

यथार्थ के धरातल की

आवरण बनी कल्पना

जीवन की कड़वाहट में

होता सच है सपना|

सपनों में इतराती हैं

कविताएँ आपकी||

हर्ष बनी कविता

विषाद बनी कविता

रच-बस मन में

स्वभाव बनी कविता|

हंस कर हंसाती हैं

कविताएँ आपकी||

गाती हैं, गुनगुनाती हैं

बिन कहे कह जाती हैं

खुश्बू बन फूलों में

उतर-बस जाती हैं|

कली-कचनार हैं

कविताएँ आपकी||

नदियों में नीर बन

करती हैं कलरव

नाविक का नाव बन

मचाती हैं हलचल|

लहरों पर इठलाती हैं

कविताएँ आपकी||

कविता है ऋता की

ऋता बनी कविता

ओर है, अंत भी

अनन्त है कविता|

आंगन की तुलसी हैं

कविताएँ आपकी||

भाव करे मह-मह

छंद करे कलरव

रस की सरिता में

अलंकार हैं अभिनव|

जीवन श्रृंगार की

कविताएँ आपकी||

ऋता शेखर 'मधु' को ससम्मान-

डॉ लक्ष्मीकांत सजल

शिक्षा प्रतिनिधि

हिन्दी दैनिक आज

पोती, बेटी, बहन, भतीजी, बहू, पत्नी, माँ, मासी, बूआ, मामी, चाची,सहेली का किरदार निभाने के बाद भविष्य में कुछ नए किरदार निभाने हैं...सासू माँ, नानी, दादीः)

और वानप्रस्थ तक पहुँची तो मोक्ष की ओर टकटकी लगाए एक अशक्त वृद्धा का किरदार!!

सर्टिफिकेट के अनुसार मेरा परिचय---

नाम रीता प्रसाद उर्फ ऋता शेखर मधु

जन्म ३ जुलाई, पटना में

शिक्षा एम. एस. सी.( वनस्पति शास्त्र), बी. एड.

पटना विश्वविद्यालय से

संप्रति शिक्षिका

पापा का नाम- स्व० चन्द्रिका प्रसाद, सचिवालय में कार्यरत थे|

सरलता, निश्छलता, निष्कपटता उनके इन गुणों को अनजाने ही हम भाई-बहनों ने आत्मसात् कर लिया था|

माँ का नाम श्रीमती रंजना प्रसाद, सरकारी हाई स्कूल में वरीय शिक्षिका थीं|

कर्मठता और सहनशीलता उनसे सीखा|

विधाएँ, जिनमें मैं लिखती हूँ कविता, लघुकथा, कहानी, आलेख, बाल कविता, छंद

जापानी छंद-हाइकु, ताँका, चोका, माहिया

हिन्दी छंद चौपाई, दोहा, कुण्डलिया, हरिगीतिका, अनुष्टुप, घनाक्षरी, रोला

ग़ज़ल भी लिखने की कोशिश करती हूँ|

मेरे दो ब्लॉग्स जून २०११ को मेरे सुपुत्र ने ब्लॉग बनाया| तब से नियमित रूप से रचनाएँ प्रकाशित करने की कोशिश करती हूँ|

१) मधुर गुंजन http://madhurgunjan.blogspot.in/

२) हिन्दी हाइगा http://hindihaiga.blogspot.in/



मेरा शौक -
चित्रकारी

प्रिंट प्रकाशन

भाव-कलश २९ कवियों का ताँका संग्रह, सम्पादकद्वय - रामेश्वर काम्बोज हिमांशुजी

एवं डॉ भावना कुँअर जी

खामोश, खामोशी और हम रश्मिप्रभा जी द्वारा संपादित साझा काव्य-संग्रह

शब्दों के अरण्य में - रश्मिप्रभा जी द्वारा संपादित साझा काव्य-संग्रह

उदंती मासिक पत्रिका में मेरी कविता(मई)

संचयन २०११ के १०० लघुकथाकारों में मेरी भी तीन रचनाएँ ,

सम्पादक डॉ कमल चोपड़ा जी

समीक्षा दिलबाग विर्क जी के हाइकु-संग्रह माला के मोती में मेरी समीक्षा

कुछ और भी

खुद को शांतचित पाती हूँ तब

जब सर पर पल्लू लिए

हाथों में अर्ध्य का जल ले

तुलसी-चौरा की परिक्रमा करती

सबकी भलाई के लिए प्रार्थना करती हूँ|

दूसरी संतुष्टि

ऋता मैडम बनी

अपने विद्यालय में

बच्चों के साथ

अपना बचपन जीती हूँ|

तीसरी संतुष्टि ब्लॉग पर

अपनी लिखती

सबकी पढ़ती

नई-नई बातें सीखती हूँ|

झूठ से सख़्त नफ़रत करती हूँ|

कुछ ऐसा लिखना चाहती हूँ जो

समाज और देश के हित में हो|


शनिवार, 15 सितंबर 2012

परिचय-पूनम जैन कासलीवाल



पापा को चाहिए थी गुड़िया,
माँ ने मांगी अपनी परछाई ,
इसलिए तो दो भइयो के ,
उपरांत मै हूँ आई ...
नटखट -चंचल जिंदगी से भरपूर ,
हँसना -हँसाना यही है बस कबूल,
बचपन बीता मस्ती मे ,
गली मै किया खूब हुड़दंग ,
न चिंता न फिकर ,
भइयो संग किया धमाल,
छोटी बहना को भी किया स्वीकार ,
पढ़ने -लिखने का शौक रहा ,
अपनाया अध्यापिका का जीवन ,
विवाह उपरांत छोड़ा देश ,
पर माटी का मोह नही छोड़ पायी ,
दो प्यारे बच्चों की माँ ,
माँ कम ,सखी हूँ ज़्यादा ।
माँ ,पत्नी ,बेटी ,बहू ,
अनेकों पदवियों का भार,
इनके सब के बीच भी ,
गर्व है मुझे ,
मुझमें है मेरा "मै " जीवित ॥

जन्मतिथि - 25 दिसंबर 1967
स्थान - अलीगढ़
शिक्षा - स्नातकोतर ( हिन्दी ) दिल्ली विश्वविदायलय
भाषा ज्ञान - हिन्दी , अंग्रेज़ी
कार्य- शिक्षिका
शौक - चित्रकारी , कविता लेखन

1994 से 2008 तक - बहरीन ( मिडिल ईस्ट) मे निवास ,
2008 - अब तक - टोरोंटो ( कनाडा)

लिखने का शौक तो स्कूल से ही था । कॉलेज मे भी हल्का - फुल्का लिखा ।
शादी होने के बाद नौकरी , परिवार के बीच बस अपने शौक दब गए । अब बच्चे बड़े हुये तो पिछले दो साल से कलम और कूँची दोनों चलने लगी है ।
http://kasliwalpoonam.blogspot.in/ 

गुरुवार, 13 सितंबर 2012

परिचय - संगीता स्वरुप



मेरा परिचय क्या ? एक नगण्य रजकण के समान , विशाल सागर की मात्र एक बूंद । ब्लोगिंग ने एक प्लैटफार्म दिया जहां अपनी बात रख सकूँ । परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालने का प्रयास करती हूँ इसी लिए खुद को नदी सदृश्य समझती हूँ ।
कुछ विशेष नहीं है जो कुछ अपने बारे में बताऊँ...

दरिया हूँ मैं
मुझे बहने दो
बहना ही स्वाभाव है मेरा
उसे वैसे ही रहने दो
तुम चाहोगे कि
मुझे बाँध लोगे
और अथक प्रयास
से मुझे रोक लोगे
तो ये तुम्हारा
एक निरर्थक प्रयास है
कब बाँध पाई है
कोई नदी ?

तुम कहोगे कि -
मैं मानव पुत्र
"नदी को बाँध चुका हूँ
नहरें निकाल चुका हूँ
बिजली बना चुका हूँ "
पर मेरा प्रश्न है -
फिर उसके बाद ?

फिर से बही है नदी
अपने उसी रूप में
अपने गंतव्य की ओर
जाते हुए
इठलाते , बल खाते हुए
तुम रोक नही पाए उसे ।
इसीलिए कहती हूँ कि
जैसा जिसका स्वाभाव है
उसे वैसा ही रहने दो
मुझे भी बस
दरिया जैसा ही बहने दो ।
और यही निरंतर बहना मुझसे कुछ सृजन करवा जाता है --
मन के भावों को कैसे सब तक पहुँचाऊँ कुछ लिखूं या फिर कुछ गाऊँ । चिंतन हो जब किसी बात पर और मन में मंथन चलता हो उन भावों को लिख कर मैं शब्दों में तिरोहित कर जाऊं । सोच - विचारों की शक्ति जब कुछ उथल -पुथल सा करती हो उन भावों को गढ़ कर मैं अपनी बात सुना जाऊँ जो दिखता है आस - पास मन उससे उद्वेलित होता है उन भावों को साक्ष्य रूप दे मैं कविता सी कह जाऊं.

नाम ----- संगीता स्वरुप
जन्म .... ७ मई १९५३
जन्म स्थान .. रुड़की ( उत्तर प्रदेश )
शिक्षा ... स्नातकोत्तर ( अर्थशास्त्र )
व्यवसाय ... गृहणी ( पूर्व में केन्द्रीय विद्यालय में शिक्षिका रह चुकी हूँ )
शौक . हिंदी साहित्य पढ़ने का , कुछ टूटा फूटा अभिव्यक्त भी कर लेती हूँ
निवास स्थान ... दिल्ली

ब्लोग्स ----------- http://geet7553.blogspot.com/
http://gatika-sangeeta.blogspot.com/

मेल आई डी - sangeetaswarup@gmail.com

प्रकाशित पुस्तक -- उजला आसमां (२०११) ISBN - 978-81-909734-6-5.

साझा काव्य संग्रह - अनमोल संचयन , टूटते सितारों की उड़ान , शब्दों के अरण्य में , प्रतिभाओं की कमी नहीं

वटवृक्ष , गर्भनाल , अविराम साहित्यिकी पत्रिका में प्रकाशित कुछ रचनाएँ .

बुधवार, 12 सितंबर 2012

परिचय - सलिल वर्मा


मेरा परिचय
खुद मुझको मालूम नहीं है.
कितने जन्मों से
ना जाने कितने परिचय
लेकर घूम रहा है यह माटी का चोला
और ना जाने कब तक यूँ ही
आने और जाने का चक्र
चलेगा इस नश्वर शरीर के साथ
मुझे मालूम नहीं खुद
मेरा परिचय!
जब से धारण किया है मैंने इस चोले को
सलिल कहकर पुकारते हैं सब मुझको
मैं पिछली आधी शताब्दि से खुद को भी यह मान चुका हूँ
जब कोई मुझको पुकारता है यह कहकर सुनता हूँ और बोलता हूँ
देता जवाब हूँ
पर जब ख़ुद से बात कभी करना चाहूँ तो
क्या कहकर ख़ुद को पुकार लूँ ख़ुद को नाम कौन सा दूँ मैं?
सोच यही घुटता रहता हूँ. एक रोज़
जब अपने अन्दर
दिल दिमाग से पार कहीं जाकर देखा
तब मुझे कहीं भी दिखा नहीं मेरा शरीर यह माटी का
बस एक किरण का पुंज दिखा
किरणें बिखेरता.
उस प्रकाश में
शीतलता थी शांति और आनंद का एक अद्भुत अनुभव था
वह प्रकाश क्या मैं था
‘मैं’ जैसा शायद कुछ वहाँ नहीं था नहीं वहाँ था ‘तुम’ ‘वह’ या कोई भी दूसरा. कितने जन्मों से कितने ही रूप बदलकर
सोच रहा हूँ
कब इस चोले से पाऊँ छुटकारा जल्दी
और उस ज्योतिर्पुंज में एकाकार हो सकूँ
मुक्त हो सकूँ “मैं” से
और आज़ाद हो सकूँ
बार-बार इस चोले की अदला बदली से
और पा जाऊँ
ख़ुद का ख़ुद से असली परिचय!!

वो जो मेरा परिचय है
नाम: सलिल वर्मा
जन्म-तिथि: 12 फरवरी 1961
जन्म-स्थान: पटना, बिहार माता-पिता: श्रीमती बृज कुमारी – श्री शम्भु नाथ वर्मा गर्ल फ्रेंड्स: श्रीमती रेणु स. प्रिया (जीवन संगिनी)
प्रतीक्षा प्रिया (पुत्री)
पत्नी की सबसे अच्छी बात: वो मेरा ब्लॉग बिल्कुल नहीं पढतीं
मित्र: श्रीप्रकाश द्विवेदी एवम चैतन्य आलोक (मेरी सभी पोस्ट्स के प्रथम श्रोता) – इनके बिना
मेरे वजूद की कल्पना नहीं की जा सकती.
शिक्षा: एम. एस-सी. (रसायन शास्त्र), एम.बी.ए. (वित्त), एल-एल.बी
वृत्ति: एक आर्थिक संस्थान में कार्यरत, सम्प्रति गुजरात में पदस्थापित
अभिरुचि:फिल्म संगीत और साहित्य
प्रेरणा: सर्वश्री के. पी. सक्सेना, गुलज़ार और डॉ. राही मासूम रज़ा
गुरू: श्री कृपा शंकर बहादुर (शैक्षिक) और श्रीमती पुष्पा अर्याणि (अभिनय) रचनायें: व्यवस्थित रूप से अपने व अन्य ब्लॉग पर लिखी रचनायें
मेरी श्रेष्ठ रचनायें: वे जो लिखकर फाड़ दीं
प्रकाशित: कोई नहीं-कभी नहीं
सम्मान व पुरस्कार: एक बहुत बड़ा अनदेखा परिवार और उनसे मिलने वाला निरंतर स्नेह
अविस्मरणीय:कम माई बिलवेड – पर्ल एस. बक और एलेवेन मिनट्स – पॉलो कोएल्हो (विदेशी उपन्यास), मृयुंजय – शिवाजी सावंत (मराठी),जन अरण्य – शंकर (बांगला), चेम्मीन – तकषि शिवशंकर पिल्लै (मळयालम), दिल एक सादा कागज़ – राही मासूम रज़ा (हिन्दुस्तानी), फ्लाइट ऑफ द पिजंस – रस्किन बॉण्ड (अंगरेज़ी), मोहन दास – उदय प्रकाश (हिन्दी) इफ गॉड वाज़ अ बैंकर – रवि सुब्रमनियन (आर्थिक विषय पर आधारित उपन्यास अंगरेज़ी) और इसी शृंखला के दो अन्य उपन्यास (डेविल इन पिन-स्ट्राइप्स तथा इंक्रेडिबल बैंकर), पन्द्रह पाँच पचहत्तर – गुलज़ार (नज़्में हिन्दुस्तानी) और बहुत कुछ.
रूपांतरण: ओशो के प्रवचनों से धार्मिक आस्था:श्रीमद्भागवत गीता के सम्पर्क में आने के पूर्व नास्तिक
मेरे ब्लॉग्स:सम्वेदना के स्वर और चला बिहारी ब्लॉगर बनने

सोमवार, 10 सितंबर 2012

परिचय - डॉ कविता वाचक्नवी




शिक्षा :
एम.ए.-- हिंदी (भाषा एवं साहित्य),
प्रभाकर-- हिन्दी साहित्य एवं भाषा,
शास्त्री – संस्कृत साहित्य
एम.फिल. -- Sociolinguistics (स्वर्णपदक)​​​​ किसी भी भारतीयभाषा में उक्त सैद्धांतिकी पर पहला शोध
पी.एच.डी. -- आधुनिक हिन्दी कविता और आलोचना
भाषाज्ञान :
पंजाबी (मातृभाषा), हिंदी, संस्कृत, मराठी, अंग्रेजी
प्रवास :
नॉर्वे, जर्मनी, थाईलैंड, यू.के., स्पेन,
प्रकाशन :
1)----"महर्षि दयानन्द और उनकी योगनिष्ठा" (शोध पुस्तक) 1984 / (गोविन्दराम हासानन्द प्रकाशन, नई दिल्ली)
2)----"मैं चल तो दूँ" (कविता पुस्तक) 2005 (सुमन प्रकाशन, हैदराबाद)
3)----"समाज-भाषाविज्ञान : रंग-शब्दावली : निराला-काव्य" ( पुस्तक ) जनवरी 2009 / (हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद)
4)----"कविता की जातीयता" (आलोचना-ग्रन्थ ) मार्च 2009 / हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद)
5)----कविता, गीत, कहानी, शोध, 50 से अधिक पुस्तकों की समीक्षाएँ, संस्मरण, ललित निबंध, साक्षात्कार तथा रिपोर्ताज आदि विधाओं में देश-विदेश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर लेखन
6)----अनेक रचनाओं के पंजाबी, नेपाली, असमिया, बोडो, तेलुगु, रूसी व अंग्रेजी में अनुवाद हुए
7)----एन.सी.ई.आर.टी.की अन्यभाषा/ हिन्दी की पाठ्यपुस्तक (कविता सम्मिलित) 2002
8)----'ओरियंट लाँगमैन' की 'नवरंग रीडर' (दोहे सम्मिलित) 2003
9)----केरल राज्य की 7वीं व 8वीं की द्वितीय भाषा हिन्दी की पाठ्यपुस्तक (बाल कविताएँ सम्मिलित ) 2002
10)----टीवी विज्ञापनों के लिए लेखन
11)--- समवेत संकलनों में रचनाएँ

संपादन :
1)--- "स्त्री सशक्तिकरण के विविध आयाम" (ग्रंथ) (2004) गीता प्रकाशन, हैदराबाद
2)---दक्षिण भारत कान्यकुब्ज सभा स्मारिका (2003)

सम्मान :
1) हिन्दुस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद द्वारा `भाषा के लब्धप्रतिष्ठित विद्वान' के रूप में सम्मानित (जनवरी 2009)
2) दिल्ली में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, साहित्य अकादमी तथा अक्षरम् का अलंकरण “सूचना प्रौद्योगिकी सम्मान'” ( `Aksharam IT Award' for contribution to Hindi Langu.& Lit. through technology ) (2010)
3) `कर्पूर वसंत सम्मान' (2003), ( उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, विश्वविद्यालय प्रकल्प, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा द्वारा प्रदत्त )
4) बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड द्वारा संस्कृत भाषा के उन्नयन हेतु सम्मानित (2008)
5) भारत भवन, भारतीय उच्चायोग लन्दन में सम्मान (2008)
6) `राष्ट्रीय एकता सद्‌भावना पुरस्कार' (2002), (सामाजिक, सांस्कृतिक व राष्ट्रीय मूल्यों के प्रचार प्रसार के क्षेत्र में अवदान हेतु)
7) `दलित मित्र' (2003), (भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा प्रदत्त )
8) `विद्यामार्तंड' (2004),
9) `महारानी झाँसी सम्मान' (2001) स्त्री सशक्तीकरण के विविध क्षेत्रों में दी गई सेवाओं हेतु
10) ऑथर्ज़ गिल्ड ऑफ इंडिया, द्वारा (हैदराबाद में) सम्मानित (अगस्त 2011)
11) ब्रिटेन में भारतीय दूतावास द्वारा "विशिष्ट सम्मान" से सम्मानित (जून 2011 )

संप्रति :-
1)----संस्थापक-महासचिव – 'विश्‍वम्भरा' – भारतीय जीवनमूल्यों के प्रसार की संकल्पना (संस्था)
2)---- सदस्य - ‘केदारसम्मान समिति’ (बाँदा )
3)--- अध्यक्ष - राष्ट्रीय विचारमंच , आ.प्र.प्रकोष्ठ
5)--- सचिव – स्त्री समाज, अंतर्राष्ट्रीय वेद प्रतिष्ठान न्यास
6)--- सलाहकार संपादक - `माटी' (प्रगतिशील चेतना की संवाहक त्रैमासिक)

अन्य
1)---वर्ष 1995, 1996 में नॉर्वे में योग व ध्यान की कक्षाओं का संचालन, संयोजन व नियमन
2)---'आर्य लेखक कोश' (सं.- डॉ.भवानीलाल भारतीय) में परिचय व उल्लेख (सन् 1989)
3)----केंद्र सरकार के विविध उपक्रमों (NFC, NMDC, Banks आदि अनेक) में राजभाषा हिन्दी के क्रियान्वयन विषयक आयोजनों में वक्ता के रूप में भागीदारी
4)----- आर्यसमाज बैंकॉक के आमंत्रण पर दिसंबर 1999 से फ़रवरी 2000 तक 'संस्कृत एवं हिन्दी भाषा-साहित्य में भारतीय वैदिक संस्कृति' विषयक व्याख्यान-यात्रा
5)----जीवनमूल्यों-पर केंद्रित सर्टिफ़िकेट-कोर्स का नियमन व संचालन
6)----केंद्रीय विद्यालय संगठन, नई दिल्ली द्वारा आयोजित 16 राज्यों के स्नातकोत्तर हिन्दी अध्यापकों के 3 सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविरों में 'रिसोर्स पर्सन' के रूप में साहित्य, भाषा, भारतीयता और मूल्यशिक्षा का दीर्घकालीन अध्यापन
7)----अनगिनत गंभीर गवेषणापूर्ण शोध आलेख
8)----विविध अखिल भारतीय व अन्तरराष्ट्रीय व विश्वविद्यालयीय संगोष्ठियों में भाषा, स्त्रीविमर्श, समाज, पत्रकारिता, काव्य, आलोचना, लैंग्वेज़ कम्प्यूटिंग (इंडिक), व्यंग्य, संस्मरण, कथासाहित्य, संस्कृतसाहित्य, काव्यशास्त्र, नाटकसाहित्य, दर्शन, तुलनात्मक साहित्य आदि अनेक विषयों पर पत्र-प्रस्तुति, संयोजन, अध्यक्षता एवम् संचालन
9)----डॉ.नामवर सिंह, डॉ.विद्यानिवास मिश्र, डॉ.प्रभाकर श्रोत्रिय, श्री अशोक वाजपेयी प्रभृति कवि, विद्वान् , आलोचकों आदि से समीक्षा-दृष्टियों, काव्य-विमर्श, साहित्य, भाषा, संस्कृति व विविध विधाओं आदि पर केंद्रित 35 से अधिक गहन विचार-विमर्शपूर्ण साक्षात्कार
10)----महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय एवम् उच्च शिक्षा और शोध संस्थान, विश्वविद्यालय विभाग, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा में अतिथि –अध्यापक के रूप में अंशकालिक अध्यापन
11)---- साहित्य अकादमी, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, वैज्ञानिक एवम् तकनीकी शब्दावली आयोग, नैशनल बुक ट्रस्ट प्रभृति संस्थाओं एवं देश विदेश के कई विश्वविद्यालयों एवं प्रतिष्ठित संस्थानों की संगोष्ठियों, सम्मेलनों व कार्यशालाओं में आमन्त्रित, भागीदारी, पत्र प्रस्तुति
12)----- बिहार सरकार द्वारा राज्य में संस्कृत शिक्षा के अध्ययन अध्यापन के स्तर में सुधार हेतु आमन्त्रित संगोष्ठी की अध्यक्षता ( दिसम्बर 2008)
13)---- 20वीं शती की श्रेष्ठ महिला कथाकार (सं.- श्री सुरेन्द्र तिवारी ) में सम्मिलित (प्रकाश्य)
14)----- हिन्दी व इंडिक (भारतीय भाषा) कम्यूटिंग की कार्यशालाओं हेतु विविध प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा आमंत्रित / सम्मानित
15)----- हिंदी कम्प्यूटिंग में तकनीक / नेट लेखन / प्रौद्योगिकी / पत्रकारिता में सक्रिय /
16)----केंद्रीयविद्यालय मैनेजमेंट कमेटी (एयरफ़ोर्स स्टेशन) में संस्कृतिविद् के रूप में मनोनीत (2004 - 2009 )
17) ------ भारत, यूके व स्पेन के विश्वविद्यालयों में आयोजित अंतर-राष्ट्रीय संगोष्ठियों में भाषा प्रोद्यौगिकी, लैंगवेज़ कम्प्यूटिंग व विविध साहित्यिक शोधपत्र, आलेख व प्रपत्र प्रस्तुत
18) ----दूरदर्शन सहित भारत के विविध टीवी चैनल्ज़ पर काव्यपाठ, इंटरव्यू व लंबी परिचर्चाओं में भागीदारी
19) ----ब्रिटेन में रेडियो पर लंबी वार्ताएँ व काव्यपाठ प्रस्तुत

रविवार, 9 सितंबर 2012

परिचय - साधना वैद



विशाल हिमखण्ड के नीचे
मंथर गति से बहती
सबकी नज़रों से ओझल
एक गुमनाम सी जलधारा हूँ मैं !
अनंत आकाश में चहुँ ओर
प्रकाशित अनगिनत तारक मंडलों में
एक टिमटिमाता सा धुँधला सितारा हूँ मैं !
निर्जन वीरान सुनसान वादियों में
कंठ से फूटने को व्याकुल
विदग्ध हृदय की एक अधीर
अनुच्चरित पुकार हूँ मैं !
सुदूर वन में सघन झाड़ियों के बीच
खिलने को आतुर दबा छिपा
एक संकुचित नन्हा सा फूल हूँ मैं !
वेदना के भार से बोझिल
कलम से कागज़ पर शब्दबद्ध
होने को तैयार किसी कविता की
एक अनभिव्यक्त चौपाई हूँ मैं !
करुणा से ओत प्रोत किसी
निश्छल, निष्कपट, निर्मल हृदय की
अधरों की कैद से बाहर
निकलने को छटपटाती
एक मासूम सी पार्थना की प्रतिध्वनि हूँ मैं !
वक्त की चोटों से जर्जर, घायल, विच्छिन्न
किन्तु हालात के आगे डट कर खड़े
किसी मुफलिस की आँख से
टपकने को तत्पर
एक अश्रु विगलित मुस्कान में छिपा
विदूप का रुँधा हुआ स्वर हूँ मैं !
इस अंतहीन विशाल जन अरण्य में
अनाम, अनजान, अपरिचित,
विस्मृत प्राय एक नितांत
नगण्य सी शख्सियत हूँ मैं !

अपने बारे में कहने के लिये ऐसा कुछ विशेष नहीं है मेरे पास ! बचपन माता पिता के संरक्षण में बहुत सुखद बीता ! माँ श्रीमती ज्ञानवती सक्सेना ‘किरण’ एक विदुषी महिला थीं और अपने समय की प्रख्यात कवियित्री थीं ! पिता जी श्री बृजभूषण लाल जी सक्सेना मध्य प्रदेश में अतिरिक्त जिला जज के गरिमामय पद पर आसीन थे ! साहित्य के प्रति अनन्य अनुराग विरासत में मुझे अपनी माँ से मिला ! जीवन की आपाधापी के बीच सद्साहित्य का पठन पाठन और कभी-कभी थोड़ा बहुत स्वान्त: सुखाय अपनी भावनाओं को डायरी में उकेरने का मेरा उपक्रम चलता रहा किन्तु कभी उन्हें सहेज कर सँजो कर नहीं रखा ! ग्रेजुएशन करने के बाद मात्र उन्नीस वर्ष की आयु में विवाह बंधन में बँध कर ससुराल में कदम रखा जो कि एक संयुक्त परिवार था ! गृहस्थी के दायित्व और बच्चों की शिक्षा दीक्षा की जिम्मेदारियाँ निभाते हुए साहित्य सृजन का यह शौक तनिक धूमिल पड़ गया लेकिन जब बच्चे भी अपने-अपने जीवन में स्थापित हो गये और कुछ समय मिला तो इस शौक को पुन: पुष्पित पल्लवित होने का अवसर मिला ! सितम्बर २००८ में एक मित्र के माध्यम से हिन्दी ब्लॉगजगत से पहली बार परिचय हुआ ! उनकी सहायता से ब्लॉग बनाया और सहमते सकुचाते अपना पहला कदम इस दुनिया में रखा ! तब ही से अपने ब्लॉग ‘सुधीनामा’ पर सक्रिय हूँ ! सामाजिक सरोकारों के प्रति मेरा हृदय सदैव प्रतिबद्ध रहा है और जब भी मेरे मन को कुछ विचलित करता है मैं उस पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करती हूँ ! स्वभाव से मैं एक भावुक, संवेदनशील एवं न्यायप्रिय महिला हूँ ! अपने स्तर पर अपने आस पास के लोगों के जीवन में यथासंभव खुशियाँ जोड़ने की कोशिश में जुटे रहना मुझे अच्छा लगता है !

मेरे ब्लॉग की लिंक है ------

http://sudhinama.blogspot.com

E-mail ID :

sadhana.vaid@gmail.com

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शनिवार, 8 सितंबर 2012

परिचय - रश्मि प्रभा


परिचय क्या है ?
एक अदद नाम ,
जिसके हों मायने
और जीवन में हो कुछ प्राप्य ....
नाम - रश्मि प्रभा ,
प्रसाद कुटी की सबसे छोटी बेटी ,
नाम दिया कवि पन्त ने अकस्मात्
फिर ये बात हो गई ख़ास .
शब्द भाव
मिले विरासत में
और संस्कार ...
संस्कारों की पेटी में जितने भी दस्तावेज थे ,
उनके लाभ थे तो कई घाटे भी थे .
खुद जिन्होंने दस्तावेज तैयार किये थे
उनको बस यह सुकून मिला
कि उन्होंने निकृष्ट शब्दों का प्रयोग नहीं किया ,
और अपनी ख़ामोशी लिए कमल का अस्तित्व बताते गए
बनते गए ....
दिल का दौरा जब पड़ा तब कहा - सांस नहीं ले पा रहे .
हमने कहा - कोशिश .....
वाक्य अधूरे स्तब्ध रह गए जब सुना -
" कितनी कोशिश ?
अब नहीं ..... !!! "
संस्कारों की सहनशक्ति का मुआयना जब डॉ ने किया
तो कहा - शरीर का कोई पार्ट काम नहीं कर रहा
साँसें चल रही हैं ... बस !
अंतर्द्वंद के सागर में संस्कारों का डूबना उतराना लगा रहा
तीखे शब्द
गंदे संस्कारहीन शब्द
झूठे शब्द
संदेहास्पद शब्द
संभावित सोच के शब्द
भंवर की तरह घेरा बनाते गए
पर बचपन में मिले सबक दिल से नहीं गए !
विरोध चलता रहा अन्दर
पर कमल की ज़िन्दगी पर
ऐतबार भी बना रहा .
सोचा - मरना तो है ही
तो इन दस्तावेजों के संग ही क्यूँ नहीं ...
विरासत तो विरासत होती है
उसे कैसे गँवा दूँ .
संभालकर रखा है इसे .....
अपने बच्चों को एक एक पृष्ठ सुनाती रही हूँ
प्राप्य अप्राप्य की कहानियों के बीच
वे गुलाब बनना चाहते हैं
ताकि काँटों की सुरक्षा से
उनका आंतरिक सौंदर्य सुरक्षित रहे .
कई बार कुछ हाथ बढ़े हैं
कुछ लोगों ने बेरहमी से तोड़ने की कोशिश भी की
...... और लहुलुहान होते शोर मचाया ....
तब याद आई दिनकर की ये पंक्तियाँ -
" क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो,
उसका क्या जो दंतहीन, विषहीन, विनीत सरल हो..."
ज्ञान स्मृतियाँ बहुत कुछ दे जाती हैं
मन कहता है -
"न पड़ता दिखाई यदि हो किनारा
अगर हो गई आज प्रतिकूल धारा
क्षुधित व्याघ्र सा क्षुब्ध सागर गरजता
अगर अंध तूफ़ान करताल बजता
अरे शोक मत कर समझ भाग्य जागे ..."(आरसी प्रसाद सिंह)

.................... परिचय -
एक नाम से बढ़कर जीवन अनुभव होता है .
एक ही नाम तो कितनों के होते हैं
नाम की सार्थकता सकारात्मक जीवन के मनोबल से होती है
हवाओं का रूख जो बदले सार्थक परिणाम के लिए
असली परिचय वही होता है ...
पर मांगते हैं सब सांसारिक परिचय
तो यह है एक छोटा सा परिचय मेरा आपके बीच -

जन्म तिथि - 13 फरवरी , 1958
जन्म स्थान - सीतामढ़ी
शिक्षा- स्नातक (इतिहास प्रतिष्ठा)
भाषाज्ञान-हिंदी,अंग्रेजी
पारिवारिक परिचय
माँ - श्रीमती सरस्वती प्रसाद (कवि पन्त की मानस पुत्री)
पिता - स्वर्गीय रामचंद्र प्रसाद
प्रकाशित कृतियाँ
काव्य-संग्रह: शब्दों का रिश्ता (2010), अनुत्तरित (2011), महाभिनिष्क्रमण से निर्वाण तक (2012), खुद की तलाश (2012) चैतन्य (2013)मेरा आत्मचिंतन (2012), एक पल (2012) ...
संपादन:अनमोल संचयन (2010), अनुगूँज (2011), परिक्रमा (2011), एक साँस मेरी (2012), खामोश, खामोशी और हम (2012), बालार्क (2013)एक थी तरु (2014)
वटवृक्ष (साहित्यिक त्रैमासिक एवं दैनिक वेब पत्रिका)-2011 से 2012
ऑडियो-वीडियो संग्रह:कुछ उनके नाम (अमृता प्रीतम-इमरोज के नाम)
सम्मान: परिकल्पना ब्लॉगोत्सव द्वारा वर्ष 2010 की सर्वश्रेष्ठ कवयित्री का सम्मान।
पत्रिका ‘द संडे इंडियन’ द्वारा तैयार हिंदी की 111 लेखिकाओं की सूची में नाम शामिल।
परिकल्पना ब्लॉगर दशक सम्मान - 2003-2012
शमशेर जन्मशती काव्य-सम्मान - 2011
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी कविता प्रतियोगिता 2013 भौगोलिक क्षेत्र 5 भारत - प्रथम स्थान प्राप्त 
भोजपुरी फीचर फिल्म साई मोरे बाबा की कहानीकार, गीतकार
ई-मेल rasprabha@gmail.com
संपर्क - 9371022446